सोमवार, 15 मार्च 2010

पावर कट के सुख

रात खाना खाने बैठा। तेजी से घूमते पंखे में एकाएक ब्रेक लग गए। बिजली ने अपनी कारस्तानी दिखा दी। दस घंटे की गुमनामी के बाद आई बिजली दस मिनट में फिर चलती बनी। भूख के मारे जान निकल रही थी। मोमबत्ती जलाकर फिर से खाने बैठा तो अपनी किस्मत पर हैरान रह गया। बिजली विभाग की मेहरबानी से कैंडल लाइट डिनर का सौभाग्य मिल गया। सौभाग्य की बात भी थी। बड़े-बड़े होटल में कैंडल लाइट डिनर करने का अरमान फटी जेब के चलते कभी परवान नहीं चढ़ा। लेकिन अब तो हर रात कैंडल लाइट डिनर का मजा मिलता है। वैसे इसके लिए पावर अधिकारियों को शत-शत नमन करना चाहिए। बिजली कट से लोगों को कई सुख मिल रहे हैं। इसने दोबारा से संयुक्त परिवारों का अहसास कराया है। रात-रात भर बिजली गायब होने से घर में एकमात्र पंखा इंवर्टर के सहारे सदस्यों का पसीना सुखाता है। दिनभर तू-तू, मैं-मैं करने वाली सास-बहू कट होते ही एक पंखे में 'एअर सुखÓ का मजा लेती हैं। पावर कॉरपोरेशन कट से देश में समाजवाद लागू करने को प्रयासरत है। आरक्षण को इससे दूर रखा गया है। भले ही शहर अल्पसंख्यकों का हो या पिछड़ों का, कट तो झेलना ही होगा। वैसे नेता अगर कट में भी आरक्षण लाभ देने की सोचे तो बहुत फायदा होगा। संस्थानों में जो पढ़ेंगे वो वोट नहीं देंगे, लेकिन जो 'पावर रिजरवेशनÓ से भरी गर्मी बिजली सुख लेंगे, वो जरूर वोट देंगे। कुछ लोग जनरेटर और इंवर्टर से समाजवादी व्यवस्था के प्रथम चरण में सेंध लगाने की भी कोशिश कर रहे हैं। खैर कटौती इतनी लंबी होती है कि जनरेटर की सांस फूलने लगती है और इंवर्टर का दम निकल जाता है। फिर सभी एक से हैं। तपती गर्मी में भी कुछ लोग पानी से डरते हैं। पावर कॉरपोरेशन उन्हें पसीने में नहलाने की सुविधा देता है। गर्मी में कुछ लोग अधिकारियों को कोसते हैं। यह सही नहीं है। ये वो लोग हैं जो सभी को समानता के हक का विरोध करते हैं। गर्मी के मौसम में कॉरपोरेशन अधिकारी भी चिंतन में डूब जाते हैं। चिंतन इस बात का आखिर रोस्टिंग का समय क्या हो? पावर अधिकारियों को लोगों के कैंडल लाइट डिनर से लेकर नहाने और परिवारों को जोडऩे तक का इंतजाम जो करना पड़ता है। अंतिम टुकड़ा तोड़ते ही बिजली फिर आ गई और पंखा चल पड़ा। पंखे की हवा से मोमबत्ती बुझ गई और मेरा कैंडल लाइट डिनर का मजा किरकिरा हो गया। मैं फिर कटौती से मिलने वाले सुख का इंतजार करके लगा।
गौरव त्यागी

3 टिप्‍पणियां:

  1. bahut khub....tumhari lekhni ki dhaaar aur bhi tez ho gai hai ....badhai

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  2. mitra, Aapka vayng padkar bijli adhikari se lekar apan jaise fakkad kuchh der garv kar sakte hain. apne rochak shaily me viksit deshon ki katar me shamil hone ko aatur hamare desh ki bujli vavshtha ki pol khol di.bahut dinon bad kisi ke blog me ek roh me kuchh padne ko mila.

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  3. kya khoob likha hai...
    isse padhkar to power cut mujhe har problem ka solution lagne laga hai

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