बुधवार, 7 अप्रैल 2010

ये कहां आ गए हम

तेजी से बदलते दौर में कई नई तरह की चुनौतियां आ गई है। बुधवार को मैं रिपोर्टिंग के सिलसिले में एक हैल्थ चैकअप कैंप पहुंचा। वहां हड्डियों की निशुल्क जांच चल रहीथी। दोपहर बाद आए परिणाम चौकाने वाले थे। करीब अस्सी फीसदी लोगों की हड्डियों में कैल्शियम कम था। ताज्जुब की बात ये थी कि बूढ़ों के साथ-साथ जवान भी इसका शिकार थे।
डा.बीपी त्यागी से बात हुई तो उन्होंने बताया कि बदलती जीवन शैली इसका कारण है। तेजी से हो रहे शहरीकरण ने नए-नए रोग दिए हैं। दरअसल आस्टोपोरेसस रोग से बचने के लिए कैल्शियल लेना और धूप में निकलना जरूरी है। एक बेहतर लाइफ स्टाइल की तलाश में गांव से शहर आई पीढ़ी के पास मानसिक तनाव तो बहुत है, लेकिन शारीरिक काम नहीं है। मनोचिकित्सक डा.संजीव त्यागी ने बताया कि अवसाद के केस बढ़ गए हैं। बड़े-बुजुर्ग तो छोड़ो युवा पीढ़ी के साथ किशोर भी फ्रस्टेट हैं। यह वो पीढ़ी है जो हाथ बढ़ाकर चांद छूना चाहती है, लेकिन थोड़ी से असफलता भी बर्दाश्त नहीं कर पाती।
अभी हम भूख, कुपोषण, टीवी से होने वाली मौतें नहीं रोक पाई और पढ़ी-लिखी अगली पीढी नए-नए रोगों का शिकार हो रही है। समाजशास्त्रीय परिभाषाएं बदल रही हैं। रिश्तों को नए ढ़ंग से परिभाषित किया जा रहा है। इस बार डब्लूएचओ भी शहरीकरण पर अपनी चिंता जता रहा है।गांवों का देश भारत अपने मूल्यों, संस्कारों और सरोकारों के लिए जाना जाता है, लेकिन वैश्वीकरण में यही सब दांव पर लगा है।विकास को केवल शेयर मार्केट या लाल नोटों से नहीं नापा जा सकता है। अगर मानव के संपूर्ण विकास की बात करें तो यही कहना पड़ेगा कि अंधी दौड़ में ये कहां आ गए हम?

2 टिप्‍पणियां:

  1. aankho mai nami seene mai tufaan sa kyun hai...iss shehar mai har shaqs pareshan sa kyun hai......ye lines kafi hain aj ki zindgi ko bayan karne ke liye. ye sahi hai ki aj life style ne sab kuch bigaad kar rakh dia hai lekin ye kehna bhi galat nahi hoga ki ek samay tha jab insaan khaana khata tha lekin aj khaan insaan ko kha raha hai. u can see the use of pesticides & insecticides & beside that junk food & soft drinks r another xmple of slow poison....

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  2. bhai hum kahin nahi aaye hain jahan pehle thai aaj bhi wahin hain. ye bimariyan pehle bhi hoti thi aaj bhi hoti hain.
    Ye free check up camp lagana aur usme 80% logon ko bimar batana sab doctors ke marketing k tareeke hain. kyunki jin 80% logo ko bimar bataya hai unme kuch to unke permanent grahak(Patient) ban hi jayenge.

    Aur grahak fasane ka is se accha tarika aur kya hoga?

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